फ़िज़ूल  ग़ज़ल
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कब कहाँ कैसे कोई बात कही जाती है
ये हुनर हो तो हर इक बात सुनी जाती है।

आप महफ़िल में जो आए तो खिले हैं चहरे
आप जाते हो तो होठों की हँसी जाती है।

कौन सी डोर है जो दिल को हमारे बांधे
क्यों ये बरबस ही' तेरी ओर खिंची जाती है।

सीख लो ये है महब्बत का चलन दिलवालो
आँख से' दिल की' तो' हर  बात कही जाती है।

जब भी लेता है कोई नाम तेरा मेरे सनम
तेरी खुशबू मेरी सांसों में घुली जाती है।
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राजीव जोशी
फिजूल टाइम के लिए।

Comments

  1. वाह बहुत सुन्दर। अनुसरणकर्ता गैजेट उपलब्ध कराइये। नीचे दिये गये रास्ते से :

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  2. http://bulletinofblog.blogspot.in/2017/12/2017-23.html

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  3. बधाई राजीव । अवलोकन 2017 में रश्मि प्रभा जी के द्वारा तुम्हारे चिट्ठे का चयन करने के लिये । जाकर अवलोकन करें और आभार भी व्यक्त करें। :)

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  4. जी नमस्ते,
    आप की रचना को शुक्रवार 8 दिसम्बर 2017 को लिंक की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...

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