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Saturday, 10 February 2018

होली गीत
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रसिया बालम रसिया रे, रसिया बालम रसिया रे!
रंग बसन्ती छाया है
पुलकित उर हरषाया है
कन्त भी मेरे पास नहीं
मिलने की कोई आस नहीं
व्याल विरह के डसिया रे!रसिया बालम रसिया रे.

मारे सखियाँ पिचकारी
लागे फागुन ज्यों आरी
धड़कन दिल की बढ़ती है
याद पिया को करती है
फाड़े चोली, छतिया रे!  रसिया बालम रसिया रे..

सखियों के संग होली में
बीते हँसी ठिठोली में
सखियाँ हैं सब भरी भरी
मैं विरहन बस डरी डरी
दिन गुजरा है टोली में
रात अमावस होली में
काटूँ कैसे रतिया रे!रसिया बालम रसिया रे..
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फ़िज़ूल टाइम्स
FIJOOLTIMES.BLOGSPOT.COM
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डॉ.राजीव जोशी
बागेश्वर।

10 comments:

  1. आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद मंच पर 'सोमवार' १२ फरवरी २०१८ को साप्ताहिक 'सोमवारीय' अंक में लिंक की गई है। आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

    टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

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    1. धन्यवाद सर
      उत्साहवर्धन हेतु दिली आभार

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  2. बहुत खूब राजीव जोशी जी. होली की इस गुझिया में आपने हुल्लड़, हुड्दंग, मस्ती, शरारत, गुस्ताखी और रोमांस, सब की मिठास भर दी.

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    1. प्रणाम गुरुदेव
      आभार आपका

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  3. वाह!!बहुत खूब।

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    1. स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिए आभार

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    2. https://loktantrasanvad.blogspot.in/ पर स्थान देने के लिए धन्यवाद

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  4. वाह क्या बात है

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद

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  5. बहुत सुंदर होली गीत ...

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