"गंदी बातें" (कहानी)
*गंदी बातें*
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गंदी बात का आकर्षण भी कुछ कम नहीं है। कहानी का शीर्षक यदि 'गंदी बातें' हो तो पाठक, कुछ कहानी अपने मन में भी गढ़ने लगता है जो कि स्वाभाविक प्रक्रिया है। इस कहानी का नायक एक परिपक्व व्यक्ति है जो, शिक्षा विभाग में राज्य लोक सेवा आयोग से चयनित अधिकारी पद पर कार्यरत है। तेज दिमाग, चुस्त एवं फुर्तीले शरीर का यह नायक कब- कैसे मेरी कहानी का नायक बन बैठा यह भी अपने आप में एक कहानी है।
......खैर अरविंद दुबले पतले शरीर पर एक पेंट तथा ऊपर से पेंट के बाहर निकली लगभग बत्तीस इंच साइज की कमीज धारण कर दो-तीन दिन की बासी दाढ़ी को खुजलाते हुए जैसे ही मेरी केबिन में पहुंचा तो, कुछ देर दरवाजे पर खड़े होकर इधर-उधर देखते हुए बोला, 'अरे क्या कर रहे हो?'
'कुछ नहीं बस कुछ फाइल निपटा रहा था' । आप बताओ, मैंने कहा। 'अरे कुछ नहीं एक-दो कव्वों को टाँगकर आ रहा हूं।' अरविंद ने मुंह को पूरा गोल खोलते हुए कहा। 'चलो यार चाय पीते हैं बहुत हो गई अच्छी बातें कुछ गंदी बातें करते हैं' उसने हंसते हुए बात जारी रखी। मेरे सामने कुर्सी पर बैठा चमन सिंह ' गन्दी बातें करते हैं' सुनकर अवाक हो हमें देखने लगा। उसकी गोल हो गई आंखें और चौड़े हो गए कान 'गंदी बात' सुनते ही जैसे फैलकर एक दूसरे से मिलने को आतुर हो गए हों। ....चाय पीते हुए अरविंद बताने लगा आज ऑफिस में एक कर्मचारी शराब पीकर आया था मुँह से आ रही महक से मैं समझ गया। तुरंत उसका स्पष्टीकरण लेकर वेतन रोकने के आदेश निकाल कर आ रहा हूं। साथ ही सभी को हिदायत दे दी है कि कोई कर्मचारी भविष्य में नशे में पाया गया तो कठोर कार्रवाई करूंगा। ऐसे ही एक-आध कौव्वे टांगने पड़ते हैं, बाकी सब खुद ठीक हो जाते हैं।
..... मेरे फोन की घंटी ने उसे कुछ क्षण रोक दिया था 'ठीक है आज शाम को घर आते वक्त जरूर ले आऊंगा, पक्का!' मैंने फोन पर पत्नी से वादा करते हुए फोन काटा और अरविंद की तरफ देखते हुए कहा, 'अरे यार पत्नी ने कल चीनी मंगाई थी लेकिन मैं भूल गया, आज ले जानी है जरूर। अरविंद हंसते हुए बोला 'अरे यार भूल तो एक बार मैं गया था।' मैंने पूछा कि क्या हुआ था तो बताने लगा, अरे जब मैं ट्रेनिंग में था तो उसी दौरान मेरी शादी हुई थी। शादी के पांचवें दिन मैं फिर ट्रेनिंग में चला गया था। छठे दिन एक दोस्त के साथ बाजार की तरफ घूमने जाना हुआ तो दोस्त ने बताया कि उसके मामा की लड़की मिलने आने वाली है जो उसी शहर में रहते हैं। उसने मुझसे कहा कि थोड़ा सीरियस रहना उल्टा-पुल्टा मत बोलने लग जाना। बाजार में मैंने देखा कि एक खूबसूरत लड़की दो चुटिया बनाए हुए हमारी ही तरफ आ रही है। उसने आकर हम दोनों का अभिवादन किया और मेरे दोस्त से बात करने लगी। मैं तो उस पर मोहित हो गया था। उसे देखता ही रह गया । कितनी खूबसूरत लड़की थी वह। और उसके जाते ही अपने दोस्त से मैंने कहा कि तेरे मामा की बेटी तो बहुत सुंदर है उससे मेरी शादी की बात चला दे यार। दोस्त ने मुझे खा जाने वाली नजरों से देखा और बोला साले आज तेरी शादी को छः दिन ही हुए हैं और तू मेरी ममेरी बहन को ऐसे देख रहा है! शर्म नहीं आती तुझे। वह आगे पता नहीं क्या-क्या कहता रहा। मुझे तब याद आया कि मेरी तो शादी हो गई है। बहुत शर्मिंदगी हुई।
मैं अपनी हंसी नहीं रोक पा रहा था और बोला, यह तो गजब हो गया कोई कैसे भूल सकता है कि उसकी शादी हो गई है।' अरविंद यहीं नहीं रुका दांतो के बीच से जीभ को दबाकर बाहर निकालते हुए हंसते हुए आगे बोला, 'इससे बड़ी गंदी बात तो एक और हुई उस दिन तो शादी टूटते-टूटते बची भाई। यूँ कहूँ कि घर की चौखट पर ऐसा सिर पटका कि, पूरा घर गिरते-गिरते बचा। मैंने पूछ ही लिया कि क्या हुआ था, हालांकि मैं नहीं भी पूछता तो भी वो बता ही देता। अरविंद बोला कि बात तब की है जब मेरी शादी को साढ़े तीन साल हो गए थे और मेरा बेटा नर्सरी क्लास में दाखिला लेकर स्कूल जाने लगा था। एक दिन बीबी ने कहा कि बेटे के लिए पजामे लाने हैं, शाम को लेते हुए आइएगा। भूलना मत। मैं शाम को एक शॉपिंग मॉल में गया और बच्चों वाले सेक्शन में पजामे ढूंढने लगा तो एक सेल्स-गर्ल मेरे पास आई और बोली क्या चाहिए सर? मैंने कहा पजामें चाहिए बच्चों के लिए। उसने पूछा क्या उम्र है बच्चे की? मैंने कहा छः साल। उसने मुझे छः साल के बच्चों के कपड़े वाले सेक्शन में लाकर खड़ा कर दिया। मैंने भी छः पजामे पसंद किए और लेकर घर पहुंच गया। पहली बार बीबी के कहने पर कुछ ऐसा खरीद लाया था जो घर के सभी सदस्यों के सामने दिखा सकता था। तो ड्राइंग रूम से ही मैंने अनीता को आवाज दी और उसको खोल कर एक-एक कर पजामा दिखाने लगा। अनीता को देखकर लग रहा था कि जैसे उसे गुस्सा आ रहा है,. यह क्या उसे तो सच में गुस्सा आ रहा था। पजामा हाथ में लहरा कर पूछने लगी कि यह क्या लाए हो? मैंने कहा पजामा लाया हूं ! सुबह तुमने ही तो कहा था पाजामे लाने को। कितने साल के बच्चे के लिए लाए हो? अनीता ने पूछा। मैंने सीना ठोक कर कहा छः साल के बच्चे के लिए।
क्या कहा छः साल! आपका बेटा कितने साल का है? उसकी आवाज निरंतर तीव्र होती जा रही थी। मैंने अपनी आवाज को धीमी करते हुए जवाब दिया छः साल का है मेरा बेटा। अनीता अचानक खड़ी हो गई गुस्से और संदेह से उसकी रुआँसी लाल आंखें ऐसी लग रही थी जैसे आग और पानी एक साथ बरस रहे हों। मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है। कहाँ है तुम्हारा छः साल का बेटा? अनीता ने सवाल दागा। मैंने कहा कहीं सो रहा होगा या खेल रहा होगा। इतने में मेरी मम्मी भी तेज आवाज सुनकर ड्राइंग रूम में आ गई। अनीता ने मम्मी से रोते हुए गुस्से में कहा देखिए माँ जी ये क्या कह रहे हैं! इनका एक छः साल का बेटा है।
हें! क्या कहा रे! साढ़े तीन साल तेरी शादी को हो रहे हैं, तो तेरा छः साल का बेटा कब हो गया? अपने बेटे को देख तो ढाई साल का ही तो है वह। मैं जैसे नींद से जाग गया था। अरे ! यह मैंने क्या कह दिया।
...शिक्षा विभाग में उस दौरान लगभग रोज ही 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम' पर बातें हो रही थी जिसमें कहा गया है कि बच्चा छः साल में विद्यालय में दाखिला लेगा। मुझे इतना याद था कि मेरा बेटा स्कूल जाने लगा है तो मुझे न जाने क्यों लगा कि वह छः साल का हो गया है। ढाई साल की उम्र में नर्सरी में दाखिले का जिक्र न तो 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम' में था और न ही मेरे दिमाग के किसी कीड़े ने ऐसा जिक्र किया। मैं शर्म से मुंह छुपाते हुए बेडरूम में आ गया। लेकिन तूफान तो समुद्र में आ चुका था अब तो बस किनारों के तहस-नहस होने का समय था। मैंने पूरी जान लगा दी कि समंदर के किनारों को तूफान के थपेड़ों से बचा लूँ। बड़ी मिन्नतें और कसमों के बाद जाकर कहीं पत्नी को यकीन दिला पाया कि इस गंदी बात के पीछे क्या कारण रहा। चाय का दूसरा दौर भी समाप्त हो चुका था। कल फिर कुछ और गंदी बातें करने के वादे के साथ अरविंद ने विदा ली अपने ऑफिस की तरफ फिर किसी कव्वे को टाँगने।
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डॉ. राजीव जोशी
बागेश्वर।
फोन 9639473491
अच्छा है |
ReplyDeleteगजब का है 😄
ReplyDeleteआभार
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